शनिदेव और हनुमान जी की कथा

  शनिदेव और हनुमान जी की कथा बहुत समय पहले, जब रावण का अत्याचार बढ़ रहा था, तब सभी ग्रहों को उसने कैद कर रखा था। ग्रहों को अपने वश में रखकर वह खुद को अजेय समझता था। उन ग्रहों में शनिदेव भी शामिल थे। ⭐ 1. रावण के बंधन में शनिदेव रावण ने शनिदेव को जेल में बाँधकर रखा था ताकि उनकी दृष्टि उसके जीवन में न पड़े और उसे किसी प्रकार का विनाश न हो। परंतु शनिदेव मन ही मन प्रार्थना कर रहे थे कि कोई उन्हें मुक्त करे। ⭐ 2. हनुमान जी का अशोक वाटिका पहुँचना जब हनुमान जी सीता माता की खोज में लंका पहुँचे, तो उन्होंने रावण के द्वारा बंदी बनाए देवताओं और ग्रहों को देखा। उनकी करुणा जाग उठी और उन्होंने सभी को मुक्त करने का संकल्प किया। ⭐ 3. हनुमान जी द्वारा शनिदेव को मुक्त करना हनुमान जी ने अपने बल से रावण की बेड़ियों को तोड़ा और सभी ग्रहों को आजादी दी। शनिदेव उनके सामने आए और बोले: “हे पवनसुत! तुमने मुझे रावण के अत्याचार से मुक्त किया है। मैं तुम्हारा उपकार कभी नहीं भूलूँगा।” ⭐ 4. शनिदेव का हनुमान जी को वचन शनिदेव ने हनुमान जी को आशीर्वाद देते हुए कहा: “हे हनुमान! जो भी तुम्हारा भक्त होगा,...

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भँवरे ने खिलाया फूल फूल को ले गया राज-कुँवर: प्रेमरोग (1982)





फिल्मः प्रेमरोग (1982)
गायक/गायिकाः सुरेश वाडेकर, लता मंगेशकर
संगीतकारः लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
गीतकारः नरेंद्र शर्मा
कलाकारः ऋषि कपूर, पद्मिनी कोल्हापुरे, नंदा

( भँवरे ने खिलाया फूल फूल को ले गया राज-कुँवर
भँवरे तू कहना न भूल फूल तुझे लग जाय मेरी उमर
भँवरे ने खिलाया फूल फूल को ले गया राज-कुँवर ) -2
वो दिन अब ना रहे
क्या-क्या बिपदा पड़ी फूल पर कैसे फूल कहे
वो दिन अब ना रहे
होनी थी या वो अनहोनी जाने इसे विधाता
छूटे सब सिंगार गिरा गल-हार टूटा हर नाता
शीश-फूल मिल गया धूल में क्या-क्या दुख न सहे
वो दिन अब ना रहे
भँवरे तू कहना न भूल फूल डाली से गया उतर
भँवरे ने खिलाया फूल फूल को ले गया राज-कुँवर
सुख-दुख आये जाये जाये
सुख-दुख आये जाये
सुख की भूख ना दुख की चिंता प्रीत जिसे अपनाये
सुख-दुख आये जाये
मीरा ने पिया विष का प्याला विष को भी अमरित कर डाला
प्रेम का ढाई अक्षर पढ़ कर मस्त कबीरा गाये
सुख-दुख आये जाये
भँवरे तू कहना न भूल फूल गुज़रे दिन गये गुज़र
भँवरे ने खिलाया फूल फूल को ले गया राज-कुँवर
ना
ना रे ना
फैली-फूली फुलवारी में भँवरा गुन-गुन गुन-गुन गुन-गुन गुन-गुन गाये
काहे सोवत निंदिया जगाये -2
लाखों में किसी एक फूल ने लाखों फूल खिलाये
मंद-मंद मुस्काये
हाय काहे सोवत निंदिया जगाये
भँवरे तू कहना न भूल फूल तेरा मधुर नहीं मधुकर
भँवरे ने खिलाया फूल फूल को ले गया राज-कुँवर
भँवरे तू कहना न भूल फूल मेरा सुंदर सरल सुघड़
भँवरे ने खिलाया फूल फूल को ले गया राज-कुँवर
फूल मेरा सुंदर सरल सुघड़
फूल को ले गया राज-कुँवर
फूल मेरा सुंदर सरल सुघड़ -2


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