शनिदेव और हनुमान जी की कथा

  शनिदेव और हनुमान जी की कथा बहुत समय पहले, जब रावण का अत्याचार बढ़ रहा था, तब सभी ग्रहों को उसने कैद कर रखा था। ग्रहों को अपने वश में रखकर वह खुद को अजेय समझता था। उन ग्रहों में शनिदेव भी शामिल थे। ⭐ 1. रावण के बंधन में शनिदेव रावण ने शनिदेव को जेल में बाँधकर रखा था ताकि उनकी दृष्टि उसके जीवन में न पड़े और उसे किसी प्रकार का विनाश न हो। परंतु शनिदेव मन ही मन प्रार्थना कर रहे थे कि कोई उन्हें मुक्त करे। ⭐ 2. हनुमान जी का अशोक वाटिका पहुँचना जब हनुमान जी सीता माता की खोज में लंका पहुँचे, तो उन्होंने रावण के द्वारा बंदी बनाए देवताओं और ग्रहों को देखा। उनकी करुणा जाग उठी और उन्होंने सभी को मुक्त करने का संकल्प किया। ⭐ 3. हनुमान जी द्वारा शनिदेव को मुक्त करना हनुमान जी ने अपने बल से रावण की बेड़ियों को तोड़ा और सभी ग्रहों को आजादी दी। शनिदेव उनके सामने आए और बोले: “हे पवनसुत! तुमने मुझे रावण के अत्याचार से मुक्त किया है। मैं तुम्हारा उपकार कभी नहीं भूलूँगा।” ⭐ 4. शनिदेव का हनुमान जी को वचन शनिदेव ने हनुमान जी को आशीर्वाद देते हुए कहा: “हे हनुमान! जो भी तुम्हारा भक्त होगा,...

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मुझे कुछ कहना है


एक कस्बे के होटल का छोटा सा कमरा ...!
विवाह की बात चलायी जा रही है
लडका-लडकी को एक दूसरे को जानने के लिये अकेला छोड दिया गया है!
बिना समय गँवाये लडके ने पहल कर दी है
मेरा परिवार मेरे लिये सब कुछ है
माँ को एक ऐसी बहू चाहिये
जो पढी लिखी हो
घर के काम में हुनरमंद हो
संस्कारी हो
सबका ख्याल रखे
उनके बेटे के साथ कदम से कदम मिलाकर चले !
परिवार पुराने ख्यालात का तो नहीं पर ये जरूर चाहता है
कि ऐसा कोई आये जो हमारे रीति रिवाज को अपना ले!
परिवार की महिलायें 'चश्मा' नहीं लगातीं हैं!
भगवान की कृपा से हमारे पास सब कुछ है
हमें आपसे कुछ नहीं चाहिये
बस लडकी घर को जोडकर रखने वाली चाहिये!
मेरी कोई विशेष पसंद नहीं है
बस मुझे समझने वाली चाहिये
थोडा बहुत देश-समाज की भी जानकारी रखती हो
हाँ लम्बे बाल और साडी वाली लडकियाँ अच्छी लगतीं हैं!
आपकी कोई इच्छा हो तो बताईये !
बहुत देर से मौन बैठी लडकी ने लाज का घूँघट हटाकर
स्वाभिमान की चूनर सिर पर रख ली है!
पूरे विश्वास से बोलना शुरू कर दिया है
मेरा परिवार मेरी ताकत है
बाबा को दामाद के रूप में ऐसा बेटा चाहिये
जो उनके हर सुख दुख में 'बिना अहसान' उनके साथ खडा रहे
बिटिया के साथ घर के काम में कुछ मदद भी करे
जिसे अपनी माँ और पत्नी के बीच 'पुल' बनना आता हो
और जो उनकी बेटी को अपने परिवार की 'केयर टेकर' बनाकर न ले जाये !
जीवनसाथी से बहुत उम्मीद तो नहीं
पर ऐसा कोई जो अपनी पत्नी को परिवार में सम्मान दिला पाये
'पठानी सूट' में बिना मूँछ-दाढी वाले लडके पसंद हैं!
अपने 'स्पैक्ट्स' को खुद से भी ज्यादा प्यार करती हूँ!
आप और हम पढे लिखे हैं
तो विवाह का खर्च आधा आधा दोनों परिवार उठायें
देश के विकास में ये भी एक पहल होनी चाहिये !
और हाँ.....
हर बात सिर झुकाकर मानते रहना संस्कारी होने की निशानी नहीं है!
लडका हकलाने लगा है!
लडकी कमरा छोडकर जा चुकी है
चारों तरफ सन्नाटा पसर गया है !
कहीं दूर सभ्यता का तराजू मंद मंद मुस्कुरा रहा है
आज सदियों बाद उसके दोनों पलडे बराबर जो आ गये हैं!!

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