शनिदेव और हनुमान जी की कथा

  शनिदेव और हनुमान जी की कथा बहुत समय पहले, जब रावण का अत्याचार बढ़ रहा था, तब सभी ग्रहों को उसने कैद कर रखा था। ग्रहों को अपने वश में रखकर वह खुद को अजेय समझता था। उन ग्रहों में शनिदेव भी शामिल थे। ⭐ 1. रावण के बंधन में शनिदेव रावण ने शनिदेव को जेल में बाँधकर रखा था ताकि उनकी दृष्टि उसके जीवन में न पड़े और उसे किसी प्रकार का विनाश न हो। परंतु शनिदेव मन ही मन प्रार्थना कर रहे थे कि कोई उन्हें मुक्त करे। ⭐ 2. हनुमान जी का अशोक वाटिका पहुँचना जब हनुमान जी सीता माता की खोज में लंका पहुँचे, तो उन्होंने रावण के द्वारा बंदी बनाए देवताओं और ग्रहों को देखा। उनकी करुणा जाग उठी और उन्होंने सभी को मुक्त करने का संकल्प किया। ⭐ 3. हनुमान जी द्वारा शनिदेव को मुक्त करना हनुमान जी ने अपने बल से रावण की बेड़ियों को तोड़ा और सभी ग्रहों को आजादी दी। शनिदेव उनके सामने आए और बोले: “हे पवनसुत! तुमने मुझे रावण के अत्याचार से मुक्त किया है। मैं तुम्हारा उपकार कभी नहीं भूलूँगा।” ⭐ 4. शनिदेव का हनुमान जी को वचन शनिदेव ने हनुमान जी को आशीर्वाद देते हुए कहा: “हे हनुमान! जो भी तुम्हारा भक्त होगा,...

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विजय दिवस : बांग्लादेश का पाकिस्तान से आज़ादी का दिन (1971 India and Pak War)

 


विजय दिवस : 16 दिसंबर 1971 का इतिहास, बांग्लादेश का पाकिस्तान से आज़ादी का दिन 

भारत में 16 दिसंबर की तारीख विजय दिवस (Vijay Diwas) के रूप में मनाई जाती है. आज ही के दिन साल 1971 में भारत-पाक युद्ध (1971 India and Pak War) के दौरान 16 दिसंबर को ही भारत ने पाकिस्तान पर विजय हासिल की थी. इस जीत को पूरा देश विजय दिवस के रूप में मनाता है.

साल 1971 में हुए भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान को करारी शिकस्त मिली थी. 16 दिसंबर 1971 को ढाका मेम 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के सामने आत्मसमर्पण किया था. 12 से 13 दिन तक चले इस युद्ध में हजारों भारतीय जवान शहीद हुए थे.

भारत-पाक के 1971 युद्ध को भारत के सेना प्रमुख जनरल सैम मानेकशॉ ने नेतृत्व किया था. 16 दिसंबर को भारत ने पूरे बांग्लादेश पर और ढाका पर कब्जा कर लिया. इस तरह से 1971 के युद्ध में पाक की हार के बाद नए बांग्लादेश का जन्म हुआ.

 

 

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