शनिदेव और हनुमान जी की कथा

  शनिदेव और हनुमान जी की कथा बहुत समय पहले, जब रावण का अत्याचार बढ़ रहा था, तब सभी ग्रहों को उसने कैद कर रखा था। ग्रहों को अपने वश में रखकर वह खुद को अजेय समझता था। उन ग्रहों में शनिदेव भी शामिल थे। ⭐ 1. रावण के बंधन में शनिदेव रावण ने शनिदेव को जेल में बाँधकर रखा था ताकि उनकी दृष्टि उसके जीवन में न पड़े और उसे किसी प्रकार का विनाश न हो। परंतु शनिदेव मन ही मन प्रार्थना कर रहे थे कि कोई उन्हें मुक्त करे। ⭐ 2. हनुमान जी का अशोक वाटिका पहुँचना जब हनुमान जी सीता माता की खोज में लंका पहुँचे, तो उन्होंने रावण के द्वारा बंदी बनाए देवताओं और ग्रहों को देखा। उनकी करुणा जाग उठी और उन्होंने सभी को मुक्त करने का संकल्प किया। ⭐ 3. हनुमान जी द्वारा शनिदेव को मुक्त करना हनुमान जी ने अपने बल से रावण की बेड़ियों को तोड़ा और सभी ग्रहों को आजादी दी। शनिदेव उनके सामने आए और बोले: “हे पवनसुत! तुमने मुझे रावण के अत्याचार से मुक्त किया है। मैं तुम्हारा उपकार कभी नहीं भूलूँगा।” ⭐ 4. शनिदेव का हनुमान जी को वचन शनिदेव ने हनुमान जी को आशीर्वाद देते हुए कहा: “हे हनुमान! जो भी तुम्हारा भक्त होगा,...

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“गौरैया दिवस पर कविता”
आज पहाड़ों पर गौरैया बहुत कम नजर आती हैं ।।
न जाने क्यों आज भी ये हमें
अपनें पुरखों की याद दिलाती हैं ।।
मुझे खुब याद है हमारे मिट्टी वाले घर होते थे
जिनमें हर एक कमरे के ऊपर गौरैया के घौसले होते थे ।।
वह सुबह - श्याम आज भी याद आती है
जब गौरैया हमारे बेडे़ व छत्तों में चिक्क चिक्काती थी ।।
हर घर के आगे फलों के पेड़ होते थे
हर ऑगन में पशु बॅंधे होते थे ।।
सुबह - सुबह गौरैया की आवज उठा देती थी ।
वो बसंत की हवा महका देती थी ।।
हर पेड़े पौधे खिले-खिले नजर आते थे ।।
हम गैरैया के पीछे-पीछे दौड़े - दौड़े जाते थे ।
आज भी वो नन्नी सी  गौरैया याद आती है
न जाने  क्यों हमें अपने बुर्जगों की याद दिलाती है ।।
वो गौरैया तिनके -तिनके जोड़कर
अपना घौसला बनाती थी ।
और दाना -दाना चुंगकर उसी के पास मंडराती थी ।।
खुश नसीब हैं वो घर जिनमे गौरैया ऊड़कर आती है
अपना घौसला या आशियान वहाँ बनाती है ।।
आज ढँढ़कर भी कहीं गौरिया नजर नहीं आती है
न वो बुर्जग रहे न रहे वो दानी
जो रखते थे पहले गौरिया को खाना व पानी ।।
आज तो योंहि कविताओं के जरिये सुननी है
गौरैया की कहानी
आज भी वह न‌न्ही सी गौरिया याद आती है ।
एक वही है जो बुर्जगों की याद दिलाती है ।।
एक वही गौरैया है जो अपनों की याद दिलाती है ।।
                        पं उपेन्द्र प्रसाद भट्‌ट
                                        उत्तराँचल टिहरी गढ़वाल
                                    डागर पटटी
                                            रिंगोल गॉव

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