शनिदेव और हनुमान जी की कथा

  शनिदेव और हनुमान जी की कथा बहुत समय पहले, जब रावण का अत्याचार बढ़ रहा था, तब सभी ग्रहों को उसने कैद कर रखा था। ग्रहों को अपने वश में रखकर वह खुद को अजेय समझता था। उन ग्रहों में शनिदेव भी शामिल थे। ⭐ 1. रावण के बंधन में शनिदेव रावण ने शनिदेव को जेल में बाँधकर रखा था ताकि उनकी दृष्टि उसके जीवन में न पड़े और उसे किसी प्रकार का विनाश न हो। परंतु शनिदेव मन ही मन प्रार्थना कर रहे थे कि कोई उन्हें मुक्त करे। ⭐ 2. हनुमान जी का अशोक वाटिका पहुँचना जब हनुमान जी सीता माता की खोज में लंका पहुँचे, तो उन्होंने रावण के द्वारा बंदी बनाए देवताओं और ग्रहों को देखा। उनकी करुणा जाग उठी और उन्होंने सभी को मुक्त करने का संकल्प किया। ⭐ 3. हनुमान जी द्वारा शनिदेव को मुक्त करना हनुमान जी ने अपने बल से रावण की बेड़ियों को तोड़ा और सभी ग्रहों को आजादी दी। शनिदेव उनके सामने आए और बोले: “हे पवनसुत! तुमने मुझे रावण के अत्याचार से मुक्त किया है। मैं तुम्हारा उपकार कभी नहीं भूलूँगा।” ⭐ 4. शनिदेव का हनुमान जी को वचन शनिदेव ने हनुमान जी को आशीर्वाद देते हुए कहा: “हे हनुमान! जो भी तुम्हारा भक्त होगा,...

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आओ गौरैया को किताबों की कहानी होने से बचाएं : World Sparrow Day

  आओ गौरैया को किताबों की कहानी होने से बचाएं

 बढ़ती आबादी और तेजी से बढ़ते तकनीकी युग में कुछ वर्षों पहले घर-आंगन में फुदकने वाली छोटी सी चिडि़या आज अपने अस्तित्व को बचाने के लिए मनुष्यों और अपने आसपास के वातावरण से काफ़ी जद्दोजहद कर रही है।  आज गौरैया को बचाना हम सबके लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। अगर हम आज नहीं चेते तो वह दिन दूर नहीं जब गौरैया की कहानी सिर्फ किताबों के पन्नों पर ही सुनने को मिलेगी।


पहली बार वर्ष 2010 में मनाया गया ‘विश्व गौरैया दिवस’ पूरी दुनिया में गौरैया के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने व इसके अस्तित्व पर छाए संकट के बादलों को कम करने के लिए हर साल 20 मार्च को ‘विश्व गौरैया दिवस’ मनाया जाता है।

लगभग विलुप्ति की कगार पर पहुंचे इस नन्हें परिंदे को बचाने के लिए विश्वभर में एक अभियान की शुरूआत हुई है देखना यह है कि हम इस नन्हीं चिड़िया को बचाने में कितना समर्थ होते है।

आओ हम भी मिलकर एक प्रयास करें अपने घर-आंगन व घर की छतों में एक कोना इसके दाना-पानी और घोसले के लिए सुरक्षित रख विलुप्ति की कगार पर पहुंचे इस परिंदे को  बचाने में अपना अमूल्य योगदान दे सकते हैं।

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