शनिदेव और हनुमान जी की कथा

  शनिदेव और हनुमान जी की कथा बहुत समय पहले, जब रावण का अत्याचार बढ़ रहा था, तब सभी ग्रहों को उसने कैद कर रखा था। ग्रहों को अपने वश में रखकर वह खुद को अजेय समझता था। उन ग्रहों में शनिदेव भी शामिल थे। ⭐ 1. रावण के बंधन में शनिदेव रावण ने शनिदेव को जेल में बाँधकर रखा था ताकि उनकी दृष्टि उसके जीवन में न पड़े और उसे किसी प्रकार का विनाश न हो। परंतु शनिदेव मन ही मन प्रार्थना कर रहे थे कि कोई उन्हें मुक्त करे। ⭐ 2. हनुमान जी का अशोक वाटिका पहुँचना जब हनुमान जी सीता माता की खोज में लंका पहुँचे, तो उन्होंने रावण के द्वारा बंदी बनाए देवताओं और ग्रहों को देखा। उनकी करुणा जाग उठी और उन्होंने सभी को मुक्त करने का संकल्प किया। ⭐ 3. हनुमान जी द्वारा शनिदेव को मुक्त करना हनुमान जी ने अपने बल से रावण की बेड़ियों को तोड़ा और सभी ग्रहों को आजादी दी। शनिदेव उनके सामने आए और बोले: “हे पवनसुत! तुमने मुझे रावण के अत्याचार से मुक्त किया है। मैं तुम्हारा उपकार कभी नहीं भूलूँगा।” ⭐ 4. शनिदेव का हनुमान जी को वचन शनिदेव ने हनुमान जी को आशीर्वाद देते हुए कहा: “हे हनुमान! जो भी तुम्हारा भक्त होगा,...

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राजा ललितादित्य

 

राजा ललितादित्य का साम्राज्य मुग़लो से भी बड़ा था,
जिसे इतिहासकार भारत का सिकंदर के नाम से बुलाते हों !
राजा ललितादित्य से मुगलों और सिकंदर की तुलना न करें । तुलना करने वालों का ज्ञान वर्धन की आवश्यकता है ।
पिछले ढाई हजार वर्षों में धरती पर सबसे बड़े भूभाग पर राज्य हुआ करता था राजा ललितादित्य का । चीन का करीब आधा, रूस का दक्षिणी हिस्सा, ईरान तुर्की और मिस्र तक फैला हुआ था उनका साम्राज्य ।।
जिनका साम्राज्य असाम बांग्लादेश से लेकर पूरा तिब्बत , पूर्वी ईरान अफ़ग़ानिस्तान उत्तरी पाकिस्तान का हिस्सा , मध्य चीन , मध्य एशिया के उज़्बेकिस्तान , ताजीकिस्तान , दक्षिण कयरञ्ज़स्तान , दक्षिण पश्चिमी कजाखस्तान और तुर्केस्तान को भी जित लिया था ! जिनका साम्राज्य मध्य भारत तक फैला हुआ था !
जिस राजा ने मोहम्मद बिन कासिम के पंजाब और जम्मू कश्मीर को जितने के सपने को मिट्टी में मिलाया ,
जिसने उसे मार मार कर भागने पर मजबूर कर दिया उसे आज कोई नही जानता !
पुरे भारत के लिए ये लानत की बात है की जी वीर योद्धा ने अरबो को कश्मीर और पंजाब से मार्कर खदेड़ा , जिसके कारन इस्लामिक आक्रांता कश्मीर और पंजाब में 250 + वर्ष तक आने की दोबारा हिम्मत तक न कर सके उसे कोई नही जानता !
ये भारत का ऐसा सुरमा वीर योद्धा है जिसने उज़्बेकिस्तान को चार बार जीता , उज़्बेकिस्तान के सुल्तान ने चार बार बगावत की और राजा ललितादित्य ने चारो बार उसकी बगावत को कुचल डाला और सुल्तान को चारो बार भारी कर देना पड़ा ,
ये वही उज़्बेकिस्तान है जहाँ से मुग़ल और तैमूर मुस्लिम आक्रांता आये थे !
ऐसे वीर राजपूत को भारतीय इतिहास की किताबो में कोई जगह नही मिली ! डूब मरना चाहिए जिसने स्कूल और कॉलेज की किताबे लिखी है...
 
Source: Internet (Facebook) 
 



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