शनिदेव और हनुमान जी की कथा

  शनिदेव और हनुमान जी की कथा बहुत समय पहले, जब रावण का अत्याचार बढ़ रहा था, तब सभी ग्रहों को उसने कैद कर रखा था। ग्रहों को अपने वश में रखकर वह खुद को अजेय समझता था। उन ग्रहों में शनिदेव भी शामिल थे। ⭐ 1. रावण के बंधन में शनिदेव रावण ने शनिदेव को जेल में बाँधकर रखा था ताकि उनकी दृष्टि उसके जीवन में न पड़े और उसे किसी प्रकार का विनाश न हो। परंतु शनिदेव मन ही मन प्रार्थना कर रहे थे कि कोई उन्हें मुक्त करे। ⭐ 2. हनुमान जी का अशोक वाटिका पहुँचना जब हनुमान जी सीता माता की खोज में लंका पहुँचे, तो उन्होंने रावण के द्वारा बंदी बनाए देवताओं और ग्रहों को देखा। उनकी करुणा जाग उठी और उन्होंने सभी को मुक्त करने का संकल्प किया। ⭐ 3. हनुमान जी द्वारा शनिदेव को मुक्त करना हनुमान जी ने अपने बल से रावण की बेड़ियों को तोड़ा और सभी ग्रहों को आजादी दी। शनिदेव उनके सामने आए और बोले: “हे पवनसुत! तुमने मुझे रावण के अत्याचार से मुक्त किया है। मैं तुम्हारा उपकार कभी नहीं भूलूँगा।” ⭐ 4. शनिदेव का हनुमान जी को वचन शनिदेव ने हनुमान जी को आशीर्वाद देते हुए कहा: “हे हनुमान! जो भी तुम्हारा भक्त होगा,...

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26 जनवरी ही वह दिन है जब हम पूर्ण रूप से गणतंत्र हुए थे इस दिन हमें अपने कानूनी किताब संविधान प्राप्त हुई थी: 26 January 1950, Republic Day

 


 

"देशभक्तों के बलिदानों से
आजाद हुए हैं हम
  कोई कहे कौन हो तुम
 तो गर्व से कहेंगे
    भारतीय हैं हम"


प्रस्तावना

26 जनवरी को मनाया जाने वाला भारतीय गणतंत्र दिवस वह दिन है जब इसी दिन सन 1950 में हमारे देश का संविधान प्रभाव में आया गणतंत्र दिवस का दिन भारत के 3 राष्ट्रीय पर्वों में से एक है यही कारण है कि इसे हर जाति तथा संप्रदाय द्वारा काफी   सम्मान और उत्साह के साथ मनाया जाता है यह पर लोकतंत्रात्मक गणराज्य होने के महत्व को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है इस दिन को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय अवकाश के रूप में घोषित किया जाता है इस दिन पूरे देश में सभी स्कूलों तथा अन्य शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है

हमारा देश लोकतांत्रिक गणराज्य है किसी भी देश के लिए उसकी आजादी का दिन सबसे खास होता है और यह तब और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब बात उसके संविधान की हो हमारे तीन राष्ट्रीय पर्व हैं 26 जनवरी 15 अगस्त और 2 अक्टूबर जिन्हें हम गणतंत्र दिवस स्वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती के रूप में मनाते हैं यह तीनों दिवस अपने आप में बहुत खास हैं 26 जनवरी ही वह दिन है जब हम पूर्ण रूप से गणतंत्र हुए थे इस दिन हमें अपने कानूनी किताब संविधान प्राप्त हुई थी

26 जनवरी की परेड


"सारे जहां से अच्छा हिंदुस्ता हमारा"
यह गीत कानों में पढ़ते ही मन प्रफुल्लित हो उठता है और सर गर्व से ऊंचा हो जाता है दिल्ली की परेड का आनंद लेने के लिए देश-विदेश से लोग आते हैं खासकर वह लोग जो देश से बाहर रहते हैं इसी बहाने देश से बाहर रह रहे लोगों को देश की कला संस्कृति के बारे में जाने का अवसर भी मिल जाता है

 


Article by Renu Sabir (Meenu Dhingra)
Content Writer

 

 

 

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