शनिदेव और हनुमान जी की कथा

  शनिदेव और हनुमान जी की कथा बहुत समय पहले, जब रावण का अत्याचार बढ़ रहा था, तब सभी ग्रहों को उसने कैद कर रखा था। ग्रहों को अपने वश में रखकर वह खुद को अजेय समझता था। उन ग्रहों में शनिदेव भी शामिल थे। ⭐ 1. रावण के बंधन में शनिदेव रावण ने शनिदेव को जेल में बाँधकर रखा था ताकि उनकी दृष्टि उसके जीवन में न पड़े और उसे किसी प्रकार का विनाश न हो। परंतु शनिदेव मन ही मन प्रार्थना कर रहे थे कि कोई उन्हें मुक्त करे। ⭐ 2. हनुमान जी का अशोक वाटिका पहुँचना जब हनुमान जी सीता माता की खोज में लंका पहुँचे, तो उन्होंने रावण के द्वारा बंदी बनाए देवताओं और ग्रहों को देखा। उनकी करुणा जाग उठी और उन्होंने सभी को मुक्त करने का संकल्प किया। ⭐ 3. हनुमान जी द्वारा शनिदेव को मुक्त करना हनुमान जी ने अपने बल से रावण की बेड़ियों को तोड़ा और सभी ग्रहों को आजादी दी। शनिदेव उनके सामने आए और बोले: “हे पवनसुत! तुमने मुझे रावण के अत्याचार से मुक्त किया है। मैं तुम्हारा उपकार कभी नहीं भूलूँगा।” ⭐ 4. शनिदेव का हनुमान जी को वचन शनिदेव ने हनुमान जी को आशीर्वाद देते हुए कहा: “हे हनुमान! जो भी तुम्हारा भक्त होगा,...

News

सिराज मोहम्मद खान: 22 साल बाद वतन (पाकिस्तान ) लौटे, पर परिवार ने कहा काफिर

 सिराज मोहम्मद खान: 22 साल बाद वतन लौटे, पर परिवार ने कहा काफिर



पाकिस्तान के सिराज मोहम्मद खान की ज़िंदगी की कहानी एक दुखद मोड़ लेती है, जब वो महज 10 साल की उम्र में एक ग़लत ट्रेन में चढ़कर भारत पहुंच गए। यह घटना 1996 की है, जब सिराज, जो उस समय एक बच्चे थे, अनजाने में अपने वतन से दूर भारत आ गए। सिराज का परिवार इस बारे में कुछ भी नहीं जानता था, और उन्हें ढूंढने की तमाम कोशिशें नाकाम रहीं।

भारत में 22 साल का सफर

भारत पहुंचने के बाद सिराज ने अपने आप को नए माहौल में ढाल लिया। उन्होंने मुंबई में ज़िंदगी की शुरुआत की और वहां कई सालों तक रहे। भारत में रहकर उन्होंने साजिदा नाम की एक महिला से निकाह किया और अपनी नई ज़िंदगी की शुरुआत की। सिराज का मानना था कि उन्होंने अब अपनी नई पहचान और जीवन बना लिया है। लेकिन उनके दिल में अपने वतन पाकिस्तान लौटने की ख्वाहिश हमेशा जिंदा रही।

पाकिस्तान वापसी और परिवार का अस्वीकार

2018 में, करीब 22 साल बाद, सिराज पाकिस्तान लौटने में सफल रहे। लेकिन जिस परिवार से मिलने की उम्मीदें उन्होंने संजोई थीं, वही परिवार अब उनके लिए अनजान बन गया था। सिराज का परिवार उन्हें अपना नहीं पाया। उनकी भारतीय पत्नी के साथ निकाह और भारत में बिताए गए वर्षों को लेकर परिवार ने उन्हें "काफिर" कहकर अस्वीकार कर दिया। परिवार ने उनसे यह उम्मीद की कि वह अपनी भारतीय पत्नी को छोड़ दें, लेकिन सिराज के लिए यह मुमकिन नहीं था, क्योंकि उनके लिए साजिदा उनका जीवनसाथी थीं।

आज का संघर्ष

सिराज के लिए यह एक कठिन दौर है। वह अपने परिवार के पास लौट तो आए, लेकिन उनका मन अब भी सुकून की तलाश में है। परिवार द्वारा उन्हें अस्वीकार किया जाना उनके लिए बहुत बड़ा सदमा है। छह साल बीत जाने के बाद भी, सिराज अपने परिवार के साथ खुश नहीं हैं। उनके परिवार की शर्तें उनके लिए अस्वीकार्य हैं, और इस वजह से वह आंतरिक संघर्ष और सामाजिक अस्वीकृति का सामना कर रहे हैं।

सिराज मोहम्मद खान की कहानी उस दर्दनाक हकीकत को बयां करती है, जो एक इंसान को अपनी पहचान, रिश्तों और वतन के बीच फंसे होने की स्थिति में ला देती है।

Source : https://x.com/

Comments