शनिदेव और हनुमान जी की कथा

  शनिदेव और हनुमान जी की कथा बहुत समय पहले, जब रावण का अत्याचार बढ़ रहा था, तब सभी ग्रहों को उसने कैद कर रखा था। ग्रहों को अपने वश में रखकर वह खुद को अजेय समझता था। उन ग्रहों में शनिदेव भी शामिल थे। ⭐ 1. रावण के बंधन में शनिदेव रावण ने शनिदेव को जेल में बाँधकर रखा था ताकि उनकी दृष्टि उसके जीवन में न पड़े और उसे किसी प्रकार का विनाश न हो। परंतु शनिदेव मन ही मन प्रार्थना कर रहे थे कि कोई उन्हें मुक्त करे। ⭐ 2. हनुमान जी का अशोक वाटिका पहुँचना जब हनुमान जी सीता माता की खोज में लंका पहुँचे, तो उन्होंने रावण के द्वारा बंदी बनाए देवताओं और ग्रहों को देखा। उनकी करुणा जाग उठी और उन्होंने सभी को मुक्त करने का संकल्प किया। ⭐ 3. हनुमान जी द्वारा शनिदेव को मुक्त करना हनुमान जी ने अपने बल से रावण की बेड़ियों को तोड़ा और सभी ग्रहों को आजादी दी। शनिदेव उनके सामने आए और बोले: “हे पवनसुत! तुमने मुझे रावण के अत्याचार से मुक्त किया है। मैं तुम्हारा उपकार कभी नहीं भूलूँगा।” ⭐ 4. शनिदेव का हनुमान जी को वचन शनिदेव ने हनुमान जी को आशीर्वाद देते हुए कहा: “हे हनुमान! जो भी तुम्हारा भक्त होगा,...

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मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ ने न्याय की मूर्ति से आंखों की पट्टी और तलवार हटवाई

 मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ ने न्याय की मूर्ति से आंखों की पट्टी और तलवार हटवाई

 

नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ ने हाल ही में एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए न्याय की मूर्ति से आंखों की पट्टी और हाथ में पकड़ी तलवार को हटाने का सुझाव दिया। इस विचार के पीछे न्याय की निष्पक्षता और मानवीय दृष्टिकोण को प्रदर्शित करने की भावना है।

मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ का मानना है कि आंखों पर बंधी पट्टी से न्याय प्रक्रिया को सीमित और अंधा माना जाता है, जबकि न्याय में संवेदनशीलता और स्पष्ट दृष्टि की आवश्यकता होती है। इसके साथ ही, उन्होंने न्याय की मूर्ति से तलवार हटाने की बात कही, जो शक्ति और दंड का प्रतीक मानी जाती है।

उनका कहना है कि न्याय केवल दंडित करने का नहीं, बल्कि समाज में संतुलन और मानवता का प्रतीक होना चाहिए। उनका यह कदम न्याय व्यवस्था में नए सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।

इस फैसले के बाद न्यायिक व्यवस्था में निष्पक्षता, सहानुभूति और मानवता के मूल्यों को और अधिक प्रमुखता दी जाएगी।

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