मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शासकीय आवास पर हिंदू नव संवत्सर एवं पावन चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिवस के शुभ अवसर पर विधि-विधान के साथ हवन-पूजन किया।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शासकीय आवास पर हिंदू नव संवत्सर एवं पावन चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिवस के शुभ अवसर पर विधि-विधान के साथ हवन-पूजन किया। इस शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री ने माँ आदिशक्ति भगवती एवं देवाधिदेव महादेव से समस्त प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, समृद्धि लाने एवं प्रदेश की समृद्धि के लिए प्रार्थना की।  

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दूसरे नवरात्रि के दिन माँ ब्रह्मचारिणी

 


दूसरे नवरात्रि के दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। माँ ब्रह्मचारिणी को तप और संयम की देवी के रूप में जाना जाता है। ब्रह्मचारिणी का अर्थ होता है "तप का आचरण करने वाली"। इस दिन माँ ब्रह्मचारिणी की उपासना से भक्तों को संयम, अनुशासन, और आत्मबल की प्राप्ति होती है।

माँ ब्रह्मचारिणी श्वेत वस्त्र धारण किए हुए, एक हाथ में जपमाला और दूसरे हाथ में कमंडल लिए हुए दिखाई देती हैं। उनका स्वरूप अत्यंत शांत और तपस्वी है, जो उनकी तपस्या और साधना का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से व्यक्ति को धैर्य, साहस और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है।

पूजा विधि:

  • सुबह स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें।
  • माँ ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप जलाएं।
  • रोली, अक्षत, पुष्प, और नैवेद्य अर्पित करें।
  • देवी को सफेद फूल विशेष रूप से चढ़ाएं क्योंकि सफेद रंग शांति और पवित्रता का प्रतीक होता है।
  • माँ ब्रह्मचारिणी के मंत्र का जाप करें:
    ध्यान मंत्र: "दधाना करपद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।
    देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥"

माँ ब्रह्मचारिणी की कृपा से साधक के जीवन में धैर्य और तपस्या की भावना प्रबल होती है, जिससे वह जीवन के कठिन रास्तों पर भी दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ सकता है।

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