मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शासकीय आवास पर हिंदू नव संवत्सर एवं पावन चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिवस के शुभ अवसर पर विधि-विधान के साथ हवन-पूजन किया।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शासकीय आवास पर हिंदू नव संवत्सर एवं पावन चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिवस के शुभ अवसर पर विधि-विधान के साथ हवन-पूजन किया। इस शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री ने माँ आदिशक्ति भगवती एवं देवाधिदेव महादेव से समस्त प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, समृद्धि लाने एवं प्रदेश की समृद्धि के लिए प्रार्थना की।  

News

भिश्ती: पुराने दौर के पानी के पहरेदार, जो घर-घर पानी पहुंचाते थे

 भिश्ती: पुराने दौर के पानी के पहरेदार, जो घर-घर पानी पहुंचाते थे


पुराने समय में जब हर घर में नल कनेक्शन उपलब्ध नहीं थे, तब पानी की आपूर्ति का महत्वपूर्ण काम भिश्ती नामक लोगों द्वारा किया जाता था। ये भिश्ती अपने मशक (चमड़े की बनी पानी की थैली) में पानी भरकर घर-घर तक पहुंचाते थे और समाज के लिए अनिवार्य सेवा प्रदान करते थे। उस समय पानी की उपलब्धता सीमित थी, और कुएं, तालाब या अन्य जल स्रोतों से पानी भरना आसान नहीं होता था। ऐसे में भिश्तियों का कार्य बेहद महत्वपूर्ण और सम्मानजनक माना जाता था।

भिश्ती एक ऐतिहासिक समुदाय था जो विशेष रूप से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति का जिम्मा संभालते थे। दिनभर ये लोग मशक में पानी भरकर लोगों के घरों और महलों तक पहुंचाते थे। खासकर गर्मी के दिनों में इनकी मांग और भी ज्यादा बढ़ जाती थी, जब लोगों को ताजे पानी की जरूरत होती थी।

इतिहास के पन्नों में, भिश्तियों का जिक्र कई महत्वपूर्ण घटनाओं और युद्धों में भी आता है, जहां ये पानी की आपूर्ति सुनिश्चित कर सैनिकों की मदद करते थे। खासकर मुग़लकाल और ब्रिटिश शासन के दौरान, भिश्तियों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रही। इनका काम केवल पानी पहुंचाने तक सीमित नहीं था, बल्कि कई बार इन्होंने युद्ध के समय सैनिकों की भी मदद की। एक प्रसिद्ध किस्सा यह भी है कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान एक भिश्ती ने बहादुरी से घायल सैनिकों को पानी पिलाया और उनकी जान बचाई।

हालांकि समय के साथ जब आधुनिक जल प्रणालियों और नल कनेक्शनों का विकास हुआ, तब भिश्तियों की भूमिका धीरे-धीरे कम होती गई। लेकिन आज भी कई लोग इस समुदाय और उनके द्वारा किए गए महत्वपूर्ण कार्यों को याद करते हैं। भिश्ती न केवल समाज के लिए जल आपूर्ति करते थे, बल्कि उनका योगदान सामाजिक संरचना में भी अहम था।

भिश्ती आज भले ही इतिहास के पन्नों में सिमट गए हों, लेकिन उनकी कड़ी मेहनत और सेवा भावना की छवि आज भी जीवंत है।

Comments