शनिदेव और हनुमान जी की कथा

  शनिदेव और हनुमान जी की कथा बहुत समय पहले, जब रावण का अत्याचार बढ़ रहा था, तब सभी ग्रहों को उसने कैद कर रखा था। ग्रहों को अपने वश में रखकर वह खुद को अजेय समझता था। उन ग्रहों में शनिदेव भी शामिल थे। ⭐ 1. रावण के बंधन में शनिदेव रावण ने शनिदेव को जेल में बाँधकर रखा था ताकि उनकी दृष्टि उसके जीवन में न पड़े और उसे किसी प्रकार का विनाश न हो। परंतु शनिदेव मन ही मन प्रार्थना कर रहे थे कि कोई उन्हें मुक्त करे। ⭐ 2. हनुमान जी का अशोक वाटिका पहुँचना जब हनुमान जी सीता माता की खोज में लंका पहुँचे, तो उन्होंने रावण के द्वारा बंदी बनाए देवताओं और ग्रहों को देखा। उनकी करुणा जाग उठी और उन्होंने सभी को मुक्त करने का संकल्प किया। ⭐ 3. हनुमान जी द्वारा शनिदेव को मुक्त करना हनुमान जी ने अपने बल से रावण की बेड़ियों को तोड़ा और सभी ग्रहों को आजादी दी। शनिदेव उनके सामने आए और बोले: “हे पवनसुत! तुमने मुझे रावण के अत्याचार से मुक्त किया है। मैं तुम्हारा उपकार कभी नहीं भूलूँगा।” ⭐ 4. शनिदेव का हनुमान जी को वचन शनिदेव ने हनुमान जी को आशीर्वाद देते हुए कहा: “हे हनुमान! जो भी तुम्हारा भक्त होगा,...

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पंजुरली देवता: भगवान विष्णु के वराह अवतार का स्वरूप

पंजुरली देवता: भगवान विष्णु के वराह अवतार का स्वरूप



पंजुरली देवता दक्षिण भारत में पूजे जाने वाले एक दिव्य देवता हैं, जिन्हें भगवान विष्णु के वराह अवतार का स्वरूप माना जाता है। विशेष रूप से कर्नाटक और केरल के विभिन्न क्षेत्रों में इनकी गहरी आस्था और उपासना की जाती है। पंजुरली देवता को जंगली सूअर की दिव्य आत्मा के रूप में भी देखा जाता है, जो अपने भक्तों की रक्षा करने वाले एक शक्ति सम्पन्न देवता हैं।
 
पंजुरली देवता से जुड़ी मान्यताएं:
पंजुरली देवता को भगवान विष्णु के दस अवतारों में से तीसरे अवतार वराह का रूप माना जाता है।
यह नर जंगली सूअर की दिव्य आत्मा के रूप में पूजे जाते हैं।
यह माना जाता है कि पंजुरली देवता मानव सभ्यता की शुरुआत में पृथ्वी पर आए थे।
इनकी पूजा भूत कोला अनुष्ठान के एक महत्वपूर्ण भाग के रूप में की जाती है।
कुछ मान्यताओं के अनुसार, पंजुरली देवता को शिव शंभुता या महादेव की शक्तियों से संपन्न एक दिव्य शक्ति माना जाता है।
यह जंगलों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा करने वाले देवता के रूप में प्रतिष्ठित हैं।
 
पंजुरली देवता से जुड़े प्रमुख त्योहार:
पंजुरली देवता की उपासना के लिए ‘दैव कोला’ नामक विशेष उत्सव मनाया जाता है। यह त्योहार विशेष रूप से कर्नाटक और केरल के तटीय इलाकों में बड़े हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया जाता है। इस अनुष्ठान के दौरान, भक्तगण पंजुरली देवता की वेशभूषा धारण कर नृत्य प्रस्तुत करते हैं। इस नृत्य के माध्यम से वे देवता का आह्वान करते हैं और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
 
पंजुरली देवता दक्षिण भारत की लोक परंपरा और धार्मिक मान्यताओं में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। उन्हें न्याय, सुरक्षा और दिव्यता का प्रतीक माना जाता है। उनकी पूजा, विशेष रूप से भूत कोला अनुष्ठान में, स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का एक अभिन्न अंग है। इस प्रकार, पंजुरली देवता न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी एक विशेष महत्व रखते हैं।

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