शनिदेव और हनुमान जी की कथा

  शनिदेव और हनुमान जी की कथा बहुत समय पहले, जब रावण का अत्याचार बढ़ रहा था, तब सभी ग्रहों को उसने कैद कर रखा था। ग्रहों को अपने वश में रखकर वह खुद को अजेय समझता था। उन ग्रहों में शनिदेव भी शामिल थे। ⭐ 1. रावण के बंधन में शनिदेव रावण ने शनिदेव को जेल में बाँधकर रखा था ताकि उनकी दृष्टि उसके जीवन में न पड़े और उसे किसी प्रकार का विनाश न हो। परंतु शनिदेव मन ही मन प्रार्थना कर रहे थे कि कोई उन्हें मुक्त करे। ⭐ 2. हनुमान जी का अशोक वाटिका पहुँचना जब हनुमान जी सीता माता की खोज में लंका पहुँचे, तो उन्होंने रावण के द्वारा बंदी बनाए देवताओं और ग्रहों को देखा। उनकी करुणा जाग उठी और उन्होंने सभी को मुक्त करने का संकल्प किया। ⭐ 3. हनुमान जी द्वारा शनिदेव को मुक्त करना हनुमान जी ने अपने बल से रावण की बेड़ियों को तोड़ा और सभी ग्रहों को आजादी दी। शनिदेव उनके सामने आए और बोले: “हे पवनसुत! तुमने मुझे रावण के अत्याचार से मुक्त किया है। मैं तुम्हारा उपकार कभी नहीं भूलूँगा।” ⭐ 4. शनिदेव का हनुमान जी को वचन शनिदेव ने हनुमान जी को आशीर्वाद देते हुए कहा: “हे हनुमान! जो भी तुम्हारा भक्त होगा,...

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Why mothers day celebrate in Europe countries

विदेशो में एक महिला 2 या तीन शादी करती है और पुरुष भी।
इसलिए उनकी संताने 14 पंद्रह साल के होने के बाद अलग रहने लगते है।
और उनके जैविक माता पिता अपनी अपनी अलग अलग जिंदगी जीते है।
इसलिए बच्चे साल में एक बार अपने माता या पिता से मिलने जाते है।
लेकिन उनके माता पिता तो साथ रहते नहीं है।
इसलिए माता को मिलने का अलग दिन निर्धरित किया है और उसी तरह पिता से मिलने का अलग दिन।
जो मदर्स डे और फादर्स डे के नाम से जाने जाते है।
भारत में हम बच्चे अपने माता और पिता के साथ ही रहते है और वो दोनों भी पूरी जिंदगी अपने बच्चों के साथ रहते है।
इसलिये यहाँ हर दिन माता पिता का है।

उन्हें साल के एक दिन की जरुरत नहीं है।
माँ को याद करने के लिए किसी "मदर डे" की जरुरत नहीं , हिन्दू धर्म में तो माँ के कदमो में ही स्वर्ग बताया गया है।
यह मदर डे के चोचले तो उनके लिए है जो साल में एक बार अपनी माँ को याद करने का बहाना ढूंढते है , हमारी संस्कृति में सुबह घर से निकलते वक्त पहले माँ के पाँव छूने की परम्परा है।
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