शनिदेव और हनुमान जी की कथा

  शनिदेव और हनुमान जी की कथा बहुत समय पहले, जब रावण का अत्याचार बढ़ रहा था, तब सभी ग्रहों को उसने कैद कर रखा था। ग्रहों को अपने वश में रखकर वह खुद को अजेय समझता था। उन ग्रहों में शनिदेव भी शामिल थे। ⭐ 1. रावण के बंधन में शनिदेव रावण ने शनिदेव को जेल में बाँधकर रखा था ताकि उनकी दृष्टि उसके जीवन में न पड़े और उसे किसी प्रकार का विनाश न हो। परंतु शनिदेव मन ही मन प्रार्थना कर रहे थे कि कोई उन्हें मुक्त करे। ⭐ 2. हनुमान जी का अशोक वाटिका पहुँचना जब हनुमान जी सीता माता की खोज में लंका पहुँचे, तो उन्होंने रावण के द्वारा बंदी बनाए देवताओं और ग्रहों को देखा। उनकी करुणा जाग उठी और उन्होंने सभी को मुक्त करने का संकल्प किया। ⭐ 3. हनुमान जी द्वारा शनिदेव को मुक्त करना हनुमान जी ने अपने बल से रावण की बेड़ियों को तोड़ा और सभी ग्रहों को आजादी दी। शनिदेव उनके सामने आए और बोले: “हे पवनसुत! तुमने मुझे रावण के अत्याचार से मुक्त किया है। मैं तुम्हारा उपकार कभी नहीं भूलूँगा।” ⭐ 4. शनिदेव का हनुमान जी को वचन शनिदेव ने हनुमान जी को आशीर्वाद देते हुए कहा: “हे हनुमान! जो भी तुम्हारा भक्त होगा,...

News

गलत रत्न धारण करने से आप हो सकते है तबाह एवं बर्बाद: ज्योतिषचार्य विष्णु शर्मा : Gems Stones


टेस्टिड पुखराज  ही खरीदे, नही तो करना पड़ सकता है विपरीत परिणामों का सामना: ज्योतिषचार्य विष्णु शर्मा

रत्न धारण करने से पहले रत्न जानकारों से ले सलाह: विष्णु शर्मा

चंडीगढ़, 22 जनवरी 2021: रत्न धारण करने से जहां हमें सुख, समृद्धि एवं वैभव की प्राप्ती होती है वहीं गलत रत्न पहनने से यह हमें तबाह एवं बर्बाद भी कर सकता है। इसलिए हमें रत्नों को धारण करते हुए विशेष सावधानियां वर्तनी चाहिए।
सेक्टर 45 स्थित ज्योतिष सेंटर के ज्योतिषचार्य विष्णु शर्मा का मानना है कि जिस व्यक्ति की ज्योतिषों द्वारा पुखराज (टोपाज़) पहने की सलाह दी जाती है उन्हें पुखराज खरीदते समय सावधानी वर्तनी चाहिए, क्योंकि ज्यादातर दुकानदार पुखराज के नाम पर ग्राहकों को पीला नीलम (येलो सफायर) प्राच्य पुखराज, धुमेरा स्फटिक, साइट्रीन अथवा स्फटिक, स्कॉय पुखराज आदि के नामों से बेचते हैं, परन्तु वस्तुत: यह पुखराज नही है। क्योंकि शुद्ध पुखराज हल्का पीला, रंगहीन या सफेद होता है, इसलिए पुखराज की पूर्णतया जांच करवाकर ही खरीदना व पहनना चाहिए नही तो विपरीत परिणाम से भुगतने पड़ सकते हैं।

 ज्योतिषचार्य विष्णु शर्मा शहर के जाने माने ज्योतिषचार्य हैं। उन्हें ज्योतिष एवं रत्नों का लंबे वर्षों का अनुभव एवं ज्ञान है । उन्हें कई प्रतिष्ठित अवार्ड व प्रमाण पत्रों से सम्मानित हो चुके है। उन्हें कई बार गोल्ड मेडल देश की विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा दिए गये हैं। वे सामाजिक व कल्याणकारी कार्यो में भी संलिप्त रहते हैं और जरूरतमंद की नि:शुल्क ज्योतिष सेवा उन्हें समाधान बताते हैं।

ज्योतिषचार्य विष्णु शर्मा ने बताया कि पुखराज का रंग अधिक पीला नही होता है वह हल्का पीला, रंगहीन या सफेद होता है जबकि येलो सेफायर का रंग गहरा पीला भी होता है तथा यह पीला होकर भी नीलम ही कहलाता है और जिसे पुखराज पहनना है उन्हें नीलम के परिणाम देगा, नीलम हर किसी को नही फलता है बल्कि घातक परिणाम भी दे देता है उन्हें यह रास नही आता। अत: गलत रत्न पहनने से बचना चाहिए व इसकी लेब रिपोर्ट के साथ ही खरीदे या इस रत्न की प्रयोगशाला में जांच कराकर फिर ही पहने, पुखराज को अंग्रेज में नैचुरल टोपाज भी कहते हैं। येलो सेफायर पीला नीलम होता है। गुरू का रत्न सिर्फ पुखराज यानि नैचुरल टोपाज होता है येलो सेफायर नही।

ज्योतिषचार्य विष्णु शर्मा ने बताया कि ज्योतिष के अनुसार 9 ग्रह हैं, और सभी 9 ग्रहों के 9 रत्न हैं। सूर्य का माणिक, चंद्र का मोती, मंगल का मूँगा, गुरु का पुखराज, बुद्ध का पन्ना, शुक्र का हीरा, शनि का नीलम, राहू का गोमेद, और केतु का लेहसूनिया। आजकल लोगों में पुखराज पहनने का काफी चलन देखने को मिला रहा है। बृहस्पति गृह सारे देव ग्रहों के गुरु है। और इनका शुभ रत्न पुखराज है। जिन लोगों की कुंडली मे गुरु शुभ है। उनको शुद्ध पुखराज पहनने से काफी लाभ होता है। गुरु संतान का कारक है। विद्या का कारक है और धन का कारक है।

Comments