शनिदेव और हनुमान जी की कथा

  शनिदेव और हनुमान जी की कथा बहुत समय पहले, जब रावण का अत्याचार बढ़ रहा था, तब सभी ग्रहों को उसने कैद कर रखा था। ग्रहों को अपने वश में रखकर वह खुद को अजेय समझता था। उन ग्रहों में शनिदेव भी शामिल थे। ⭐ 1. रावण के बंधन में शनिदेव रावण ने शनिदेव को जेल में बाँधकर रखा था ताकि उनकी दृष्टि उसके जीवन में न पड़े और उसे किसी प्रकार का विनाश न हो। परंतु शनिदेव मन ही मन प्रार्थना कर रहे थे कि कोई उन्हें मुक्त करे। ⭐ 2. हनुमान जी का अशोक वाटिका पहुँचना जब हनुमान जी सीता माता की खोज में लंका पहुँचे, तो उन्होंने रावण के द्वारा बंदी बनाए देवताओं और ग्रहों को देखा। उनकी करुणा जाग उठी और उन्होंने सभी को मुक्त करने का संकल्प किया। ⭐ 3. हनुमान जी द्वारा शनिदेव को मुक्त करना हनुमान जी ने अपने बल से रावण की बेड़ियों को तोड़ा और सभी ग्रहों को आजादी दी। शनिदेव उनके सामने आए और बोले: “हे पवनसुत! तुमने मुझे रावण के अत्याचार से मुक्त किया है। मैं तुम्हारा उपकार कभी नहीं भूलूँगा।” ⭐ 4. शनिदेव का हनुमान जी को वचन शनिदेव ने हनुमान जी को आशीर्वाद देते हुए कहा: “हे हनुमान! जो भी तुम्हारा भक्त होगा,...

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वर्ल्ड पार्किंसंस डे पर आयोजित हुई वॉकाथॉन

 वर्ल्ड पार्किंसंस डे पर आयोजित हुई वॉकाथॉन

 





मोहाली, 9 अप्रैल, 2023: वर्ल्ड पार्किंसंस डे पर सिल्वी पार्क, मोहाली से पार्किंसंस जागरूकता वॉकथॉन का आयोजन किया गया। जो कि सुबह 6 बजे शुरू हुई। यह वॉकाथॉन 5 किलोमीटर की थी जिसमें पार्किंसंस रोग के रोगियों के परिवार और देखभाल करने वालों, कई धावकों - दीप शेरगिल - स्पोर्टस एक्टिविस्ट, श्री अमर चौहान, जिन्होंने भारत और विदेशों में कई स्वर्ण पदक जीते हैं, ने तथा सर्व ह्यूमैनिटी सर्व गॉड आर्गेनाईजेशन के व्हीलचेयर रनर ने भाग लिया। अप्रैल महीने को पूरा विश्व में पार्किंसंस जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है।

वॉकथॉन की आयोजक डॉ जसलवलीन कौर सिद्धू, जो कि न्यूरोलॉजिस्ट और पंजाब की पहली पार्किंसंस रोग और मूवमेंट डिसऑर्डर एक्सपर्ट हैं, ने इस अवसर पर कहा कि पार्किंसंस रोग मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिकाओं के नुकसान के साथ एक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है, जो डोपामाइन नामक एक रसायन का उत्पादन के लिए जिम्मेदार हैं। गतिविधियों का धीमा होना, शरीर में अकड़न, हाथ या पैर कांपना और चलते समय संतुलन खो देना इसका सबसे महत्वपूर्ण लक्षण है। स्मॉल हैंडराइटिंग, सूंघने की क्षमता में कमी, मूड में बदलाव, नींद में गड़बड़ी और कब्ज इसके कुछ अन्य लक्षण हैं।

डॉ जसलवलीन ने इस बात पर बल देकर कहा कि इस पर जागरूकता बढ़ाना हमारी पीढ़ी की जिम्मेदारी है क्योंकि पार्किंसंस रोग का अक्सर उम्र बढ़ने की प्रक्रिया के साथ गलत निदान किया जाता है और इसलिए उपचार अक्सर छूट जाता है या देरी हो जाती है। जागरूकता बढ़ाकर हम इसका जल्द पता लगा सकते हैं और सही उपचार की पेशकश कर जीवन की बेहतर गुणवत्ता का ला सकते हैं।

वॉकथॉन के आयोजकों को आप स्टूडेंट विंग के प्रेसिडेंट परमिंदर सिंह जायसवाल द्वारा भी प्रोत्साहित किया गया। वॉकथॉन सुबह 9 बजे सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। डॉ. जसलवलीन सिद्धू ने इस मौके पर कहा कि पार्किंसंस रोग के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए इसे प्रत्येक वार्षिक कार्यक्रम बनाया जायेगा।

डॉ जसलवलीन सिद्धू एनएचएनएन, लंदन, यूके और नेशनल न्यूरोसाइंस इंस्टीट्यूट, सिंगापुर से पार्किंसंस रोग और मूवमेंट डिस्आर्डर में स्पेशल ट्रेनिंग के साथ एक न्यूरोलॉजिस्ट हैं। वह मोहाली में प्रैक्टिसिंग हैं और पार्किंसंस रोग में उपलब्ध सबसे उन्नत उपचार विकल्पों की पेशकश कर रही हैं।

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